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जॉन्डिस (Jaundice ) क्या है

जॉन्डिस क्या है ?  यह कैसे होता है ? और इससे बचने के उपाय क्या है ? जॉन्डिस होने पर इसका इलाज (treatment) कैसे करें ? जॉन्डिस को हिंदी में क...




जॉन्डिस क्या है ?  यह कैसे होता है ? और इससे बचने के उपाय क्या है ? जॉन्डिस होने पर इसका इलाज (treatment) कैसे करें ? जॉन्डिस को हिंदी में क्या कहते  हैं ? इन सारे सवालों का जवाब आपको इस आर्टिकल में मिलने वाला है । तो इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े । 



जॉन्डिस क्या है जानें हिंदी में (what is Jaundice in hindi) -  


जॉन्डिस एक बीमारी का नाम है जिसे पीलिया नाम से 
भी जाना जाता है । इसे पीलिया इस लिए कहा जाता है  क्यूंकि इसमें इंसान की आंख और त्वचा (skin) और पेशाब पीला रंग (yellow colour) का हो जाता है । इस कारण इसे पीलिया रोग (बीमारी )कहा जाता है । 

पीलिया रोग की पहचान व्यक्ति के आंख का पीला पड़ना और इसके साथ ही नाखून और पेशाब का पीला पर जाना । यह सब लक्षण दिखाई दे तो उस व्यक्ति को पीलिया बीमारी है । लेकिन शुरुआत में यह लक्षण नहीं दिखाई देता है । यह बीमारी उग्र पर इसके लक्षण दिखाई देते हैं । 



जॉन्डिस कैसे होता है ( how is Jaundice in hindi ) 


किसी कारण वश लीवर (Liver)  में संक्रमण हो जाता है या लीवर  सही से कार्य नही कर पाता है तो रक्त में बिलीरुबिन  (Bilirubin) की मात्रा बढ़ने लगती है । जिसके कारण त्वचा और आंखे पीला परने लगता है और पेशाब भी पीला होने  लगता है जिसे पीलिया या जॉन्डिस कहते है । 
और अब आप सोच रहें होंगे की बिलीरुबिन (Bilirubin) क्या है तो चलिए इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते है । 


बिलीरुबिन क्या है (what is Bilirubin in hindi)


बिलीरुबिन एक पीले रंग (yellow pigment) का पदार्थ है । हमारे रक्त में RBC पाया जाता हैं और RBC के अंदर हिमोग्लोबिन पाया जाता है जब यह RBCऔर हिमोग्लोबिन टूटता (breckdown ) है तो बिलीरुबिन बनता है जो  और यह बिलीरुबिन बनने के बाद लीवर में जाता है जहां लीवर इसे फिल्टर करता है । और जो अवशेष होता है उसे बाहर निकाल देता है । लेकिन किसी कारण से लीवर सही से फंक्शन नही कर पाता है तो बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने लगती है । जिसके कारण पीलिया हो जाता है । 


अनकोंजुगेटेड बिलीरुबिन क्या है 

हिमोग्लोबिन टूटकर जब प्रोटीन के साथ जुड़ता है तो इसे 

अनकोंजुगेटेड बिलीरुबिन कहते है । 

अनकोंजुगेटेड बिलीरुबिन की सामान्य मात्रा 0.2 - 1.2 mg/dL तक मानी जाती है 


कोंजुगेटेड बिलीरूबिन क्या है 

जब बिलीरूबिन लीवर में जाके जब हिमोग्लोबिन से प्रोटीन अलग होकर जब शुगर के साथ जुड़ता है तो इसे कोंजुगेटेड बिलीरुबिन कहते है । 
कोंजुगेटेड बिलीरुबिन की सामान्य मात्रा 0 - 0.3 mg/dL मानी जाती है । 

टेस्ट के माध्यम से हम यह जान सकते है की अनकोंजुगेटेड बिलीरुबिन कितना है और कोंजुगेटेड बिलीरुबिन कितना है इन दोनो मात्रा को जोड़ देने से टोटल बिलीरूबीन की मात्रा का पता चलता है   
और टोटल बिलीरूबिन की मात्रा 1.4 mg/dL तक सामान्य मानी जाती हैं । लेकिन यह वैल्यू थोड़े से उपर नीचे हो सकते हैं । 

अब यह जानेंगे की बिलीरुबिन की मात्रा कैसे और क्यों बढ़ता है - 


1 अगर लीवर में किसी प्रकार इन्फेक्शन हो जैसे           हेपेटाइटिस ए या हेपेटाइटिस बी तो बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ सकता है और पीलिया हो  रोग हो  सकता हैं । 


2    अगर आप जायदा अल्कोहल यानी शराब का           सेवन करते है तो इससे पीलिया रोग होने संभावना       बढ़ जाती है । जायदा लंबे समय से दवाइयां खाने         से भी पीलिया हो जाता है । 


3   अगर लीवर से जुड़ी किसी प्रकार का आनुवांशिक       बीमारी है तो इससे पीलिया हो सकता है । 


4.    अगर पित्त में पथरी हो जाता है तो इससे भी               पीलिया रोग या jaudice होता है । 



किस उम्र के लोगों को हो सकता है पीलिया रोग 


पीलियाा रोग नवजात शिशु से लेकर वृद्धअवस्था तक के इंसान को हो सकता है । 

नवजात शिशुओं में पीलिया इतना सामान्य क्यों है (why is Jaundice so common in NEWBORN)


 नवजात शिशु में पीलिया होने के ज्यादा संभावना होता है  क्यूंकि नवजात शिशु का लीवर उतना मेच्योर नही होता है और शरीर में RBC ज्यादा होता है । RBC के टूटने से बिलीरूबीन बनता है जिससे पीलिया हो जाता है । बच्चे के जन्म के  24 घंटे के बाद पीलिया होता है तो इसे फिजियोलॉजिकल जॉन्डिस कहा  जाता है यह 80% बच्चो में होता है और यह अपने आप ही ठीक हो जाता है ।
लेकिन  पीलिया अगर नवजात शिशु में नॉर्मल लिमिट से ज्यादा रहता है या 7 दिन से अधिक रहता है तो यह बीमारी ग्रस्त पीलिया होता है और इसकी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए । 

जॉन्डिस होने के लक्षण क्या है  (symptoms of jaundice in hindi)


तो चलिए अब मैं आपको जौंडिस के कुछ लक्षण के बारे में बताता हु । 

*  आंख , नाखून और त्वचा का रंग पीला होना ।
   
*  अत्यधिक कमजोरी और थका थका सा लगना ।
    
*    सिर के दाहिने भाग में दर्द रहना ।

*    यूरिन (पेशाब) पीला आना । 
   
 *    रोगी को बुखार रहना ।
    
  *  जी मिचलाना और कभी कभी उल्टियां होना । 

  *   चिकनाई वाले भोजन से अरुचि    ।

   

  *  सिर में दर्द होना      । 


जॉन्डिस होने पर क्या खाए  


जॉन्डिश होने पर खान पान में भी  बहुत ध्यान देना होता है इसमें आपको पता रहना चाहिए की आपको क्या खाना है इसमें आपको ऐसे खानों से परहेज करना होगा जिससे यह बीमारी और बढ़ सकती है । इसमें मैं आपको बताने वाला हु की जॉन्डीश होने पर आपको क्या खाना है ।


छांछ का सेवन फायदेमंद - 

जॉन्डिश में छांछ का सेवन फायदेमंद होता है अगर आप रोज सुबह - शाम एक एक गिलास छांछ में सेंधा नमक मिलाकर पियोगे तो इससे आपको बहुत फायदा होगा । 


दही के सेवन फायदेमंद - 

जॉन्डिस में दही का सेवन बहुत फायदेमंद साबित होता है और यह बैक्टीरिया संक्रमण को रोकता है । 



जॉन्डिश होने पर क्या नही खाए 

जॉन्डिश होने पर आपको ऐसे भोजन से परहेज करना होगा जो आपके सेहत को नुकसान कर सकते है या जॉन्डिश रोग को और बढ़ा सकते है । 
इसमें मैं बताऊंगा की आपको पीलिया या जॉन्डिस में क्या नही खाना चाहिए । 

*   जायदा मिर्च मशालेदार और तला हुआ भोजन का         सेवन न करें ।

*    शराब का सेवन न करें । शराब लीवर के लिए               बहुत  हानिकारक है 


जॉन्डिश का इलाज कैसे करें (Treatment of jaundice in hindi) 


 जॉन्डिश होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं इसे समय रहते इलाज करा के आप ठीक हो सकते है । लेकिन अगर जॉन्डिस ज्यादा बढ़ जाता है तो इससे लीवर फेल्योर होने का खतरा बढ़ जाता हैं और आदमी की जान तक जा सकता है । इसलिए जब इसके लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और उसका इलाज कराएं ।

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